शिव जी का तीसरा नेत्र क्यों खुलता है?
🕉️ शिव जी का तीसरा नेत्र क्यों खुलता है? जानिए इसका रहस्य और शक्ति
भगवान शिव को त्रिनेत्रधारी कहा जाता है — उनके माथे पर एक तीसरा नेत्र है, जिसे “ज्ञान नेत्र” और “विनाश नेत्र” भी कहा जाता है।
यह नेत्र सामान्य रूप से बंद रहता है, लेकिन जब शिव जी अत्यंत क्रोधित होते हैं, तब यह खुलता है।
🔥 तीसरे नेत्र की शक्ति क्या है?
शिव जी का तीसरा नेत्र केवल एक अंग नहीं, बल्कि अनंत ऊर्जा और तप की शक्ति है।
जब यह नेत्र खुलता है, तो:
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संपूर्ण ब्रह्मांड में ऊर्जा प्रवाह होने लगता है
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जिससे विनाश, पुनर्निर्माण, और शुद्धिकरण होता है
📖 पौराणिक कथा से उदाहरण:
एक कथा के अनुसार, जब कामदेव ने भगवान शिव की तपस्या भंग करने का प्रयास किया, तो शिव जी अत्यंत क्रोधित हुए।
उन्होंने तीसरा नेत्र खोला, और उस अग्नि से कामदेव भस्म हो गए।
यही कारण है कि शिव जी का तीसरा नेत्र केवल अत्याचार, भ्रष्टता या मोह-वासना को नष्ट करने के लिए खुलता है।
🧘♂️ आध्यात्मिक अर्थ:
तीसरा नेत्र केवल बाहरी विनाश का प्रतीक नहीं, बल्कि आंतरिक अज्ञान का नाश भी करता है।
जब कोई व्यक्ति ध्यान और साधना द्वारा चेतना की ऊँचाई पर पहुँचता है, तो तीसरा नेत्र रूपी बोध प्रकट होता है।
📿 निष्कर्ष:
शिव जी का तीसरा नेत्र एक दिव्य शक्ति है — जो केवल चेतना, क्रोध और न्याय के चरम रूप में प्रकट होता है।
यह हमें सिखाता है कि हर इंसान में भी एक "आंतरिक नेत्र" होता है, जिसे जागृत करने से हम भी सत्य को देख सकते हैं।
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